Tuesday, October 20, 2015

 भारत -चीन युद्ध :क्या सच ,क्या झूठ 

                                                                                              -आलोक रंजन*

भारत को ब्रिटिश शासन से आजाद हुए अभी 15 साल ही हुए थे कि भारत पर अचानक संकट का पहाड़ टूट पड़ा । अभी तो देश खड़ा भी नहीं हो पाया था,,,,भारतीय सेना अभी जंग के लिए तैयार नहीं थी कि चीन ने भारत की कमजोरी का फायदा उठा कर आक्रमण कर दिया । वह मनहूस दिन था २० अक्टूबर १९६२ ।  मानो ऐसा लगा कि जिस प्रेमिका को कोई प्रेमी दिल - ओ - जान से चाहता हो आज  उसी  प्रेमिका ने प्रेमी के पीठ पे छूरा भोंक दिया हो । हिंदी -चीनी भाई भाई का दिल जाने क्यूँ धड़कना बन्द हो गया । एक तरफ युद्ध में भारत के १२००० जांबाज़ सैनिक थे तो वहीँ दूसरी ओर कहाँ वो चीन के ८०००० सैनिक। .......  जिसका परिणाम  कभी ना भूलने वाली भारत की अपमानजनक हार ।
खैर ,.... छोडिये साहब !मगर कल तक अपना भाई अचानक जान का दुश्मन क्यों बन बैठा ?इसके पीछे कारण क्या है ?आखिर क्यूँ चीन ने भारत पर हमला किया ?एक नयी किताब में दावा किया गया है की 'peoples republic of china 'के संस्थापक माओत्से तुंग ने  १९६२ में भारत पर हमला पंडित नेहरू को अपमानित करने के लिए किया था ,जो तीसरी दुनिया के नेता के रूप में उभर रहे थे । वहीँ दूसरी तरफ C.I.A.के पूर्व अधिकारी ने अपनी किताब 'J.F.K.'(ज़ फॉरगॉटन क्राइसिस )में लिखा है कि -"भारत द्वारा फॉरवर्ड पालिसी लागू करने से सितम्बर १९६२ में चीन भड़क गया था ।
....... रे काका जी ,लगता है कि एक भाई को दूसरे भाई की उन्नति देखी नहीं गयी । मुझको तो ये कहावत भी याद आ रही कि "भाई जैसा दोस्त और भाई जैसा दुश्मन कभी ना मिलेगा । अच्छा तो आगे चलिए साहब !.... सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी  अखबार 'ग्लोबल टाइम्स 'ने वेब संस्करण में लिखा है कि वर्ष १९६२ का युद्ध पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू जी को झटका देकर अमेरिका और पूर्व सोवियत संघ के प्रभाव में प्रभाव ज़माने के लिए था । इसने दावा किया कि उस वक़्त चीन के नेता माओत्से तुंग के गुस्से का असली निशाना वाशिंगटन और मास्को थे । …भैया जी !जब बीजिंग का मुक़ाबला वाशिंगटन और मास्को से था तो क्या नयी दिल्ली से उस वक़्त टेस्ट क्रिकेट चल रहा था । कुछ और आगे चलिए साहब क्या पता असली वजह पता चल जाए। …
"चीन जीता लेकिन वह कभी भी भारत -चीन युद्ध नहीं चाहता था "शीर्षक से लिखे गए लेख में कहा गया है कि "५० वर्ष पहले जब चीन घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तमाम समस्याओं दो -चार हो रहा था तो अमेरिका और सोवियत संघ के उकसावे में आकर नेहरू प्रशासन ने वर्ष १९५९ से १९६२ बीच भारत -चीन सीमा पर और समस्याएं खड़ी कर दी ।  .......... और बात यहीं ख़त्म नहीं हो जाती "चाइनीस एकेडेमी ऑफ़ सोशल साइंसेज "में 'सेंटर ऑफ़ वर्ल्ड पॉलिटिक्स 'के सहायक महासचिव होन्ग युआन द्वारा लिखे इस लेख में  है कि युद्ध भारत के साथ शांति स्थापित करने के लिए लड़ा गया था ।

वाह भाई वाह !!!!क्या खूब कहा है आपने किसी को चोट इसलिए पहुंचायी कि मरहम लगाने का मन कर रहा था ।  रहने दो भाई साहब! तहरीर देना बंद करो ,अब चालाकी नहीं चलने वाली ।

*बी.ए. (प्रथम वर्ष)
मास कम्यूनिकेशन 
हरिश्चंद्र पी, जी.कॉलेज

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