छद्म कट्टरवाद:देश को कमजोर करने की साजिश
यूँ तो जम्हूरियत की मजबूती हमारे देश की सबसे अहम ताकत है लेकिन वक़्त बे वक़्त इस ताकत को छद्म कट्टरवाद के नाम पर कमजोर करने की नापाक कोशिश की जाती रही है । दरअसल ,जनता को सिर्फ सत्ता की सीढ़ी समझने वाली दुर्बल राजनीतिक सोच को यह बेहतर तरीके से समझ आ जाना चाहिए कि "ये पब्लिक है सब जानती है "और जरुरत पड़ने पर 'फॉलोवर ' की भूमिका से परे 'ट्रेंड सेटर 'की भूमिका निभाना भी जानती है।नफरत ,द्वेष और तुष्टिकरण की राजनीति हमें पाकिस्तान और चीन जैसे देशों की जमात में शामिल करने पर आमादा है ।सुधीन्द्र कुलकर्णी पर पुती कालिख हमारी मज़बूत जम्हूरियत का एक ऐसा चेहरा दिखाती है जिसका रंग देश के चंद लोगों द्वारा काला करने की साजिश की जा रही है ।
सायरन ऐसे खोखले कट्टरवाद का पुरज़ोर विरोध करता है और आगाह करता है ऐसी कमजोर मानसिक राज़नीति को कि वो बाज आएं वरना अतीत का हिस्सा बनने में तनिक भी देर नहीं लगेगी ।
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